March 10, 2026

टिहरी बांध विस्थापितों की भूमि में बड़ा फर्जीवाड़ा: डीएम ने किया पर्दाफाश, अधिकारियों पर गिरी गाज

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देहरादून : टिहरी बांध पुनर्वास परियोजना के तहत एक चौंकाने वाला भूमि घोटाला सामने आया है। एक ही भूमि को दो बार बेचने और फर्जी तरीके से भूमिधरी दर्ज कराने के मामले में जिलाधिकारी सविन बंसल ने सख्त रुख अपनाते हुए जांच के बाद कई अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

यह प्रकरण शास्त्रीनगर तपोवन निवासी पीड़िता पुलमा देवी की शिकायत से सामने आया, जिन्होंने जून माह के द्वितीय जनता दर्शन में डीएम के समक्ष यह गंभीर मामला उठाया था। पुलमा देवी ने वर्ष 2007 में ग्राम फुलसनी में एक भूखंड क्रय किया था, जिसकी रजिस्ट्री और कब्जा प्रमाण पत्र दोनों उनके पास हैं। यह भूमि टिहरी बांध विस्थापितों के लिए निर्धारित आवासीय भूखंडों में से थी, जिसे मार्च 2007 में चन्दरू पुत्र अमरू को आवंटित किया गया था।

डीएम जांच में यह खुलासा हुआ कि चन्दरू ने 2007 में यह भूमि विभाग को बेच दी थी। लेकिन वर्ष 2019 में उसने दोबारा विभाग को गुमराह करते हुए उसी भूखंड को अपने नाम पुनः चढ़वा लिया। उप राजस्व अधिकारी (पुनर्वास), अवस्थापना खंड ऋषिकेश ने बिना तथ्यात्मक जांच किए यह भूमि दोबारा चन्दरू के नाम पर दर्ज करा दी। इसके बाद चन्दरू ने उसी भूमि को फिर से एक अन्य व्यक्ति को बेच दिया।

डीएम बंसल ने इसे गंभीर धोखाधड़ी करार देते हुए अधीक्षण अभियंता (टिहरी पुनर्वास) का वाहन जब्त करने और सभी विवरणों सहित तत्काल प्रस्तुत होने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि यदि सहयोग नहीं मिला, तो एसआईटी जांच की संस्तुति की जाएगी।

जिला प्रशासन ने इस मामले की अग्रेतर आपराधिक जांच की जिम्मेदारी एसडीएम मुख्यालय अपूर्वा को सौंपी है। डीएम ने कहा कि, “पुनर्वास के नाम पर विस्थापितों की पीड़ा और मजबूरी का जो दोहन किया गया है, उसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब तक पुलमा देवी को न्याय नहीं मिलेगा, प्रशासन चैन से नहीं बैठेगा। गौरतलब है कि यह मामला मा. सिविल जज (जूनियर डिवीजन) विकासनगर, देहरादून की अदालत में पुलमा देवी बनाम जतिन गोयल शीर्षक से विचाराधीन भी है।

क्या है मामला

2007: चन्दरू को ग्राम फुलसनी में 200 वर्ग मीटर भूमि पुनर्वास के तहत आवंटित हुई।

2007: चन्दरू ने उक्त भूमि विभाग को विक्रय कर दी।

2019: चन्दरू ने पुनः उसी भूमि को अपने नाम चढ़वाया और फिर बेच दी।

2025: पुलमा देवी ने जनता दर्शन में शिकायत कर मामला डीएम तक पहुँचाया।

2025: डीएम की जांच में फर्जीवाड़ा उजागर, संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई के आदेश।

यह प्रकरण टिहरी पुनर्वास परियोजना में कार्यरत अधिकारियों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। डीएम द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि पूरे पुनर्वास तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की एक ठोस शुरुआत मानी जा रही है।

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