January 28, 2026

अंशुमान केस: सुप्रीम कोर्ट से मिला न्याय, साइंस स्ट्रीम में जारी रहेगी पढ़ाई

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देहरादून : देहरादून के प्रतिष्ठित सेंट जोसेफ स्कूल के प्रबंधन की मनमानी पर सुप्रीम कोर्ट ने करारा अंकुश लगाते हुए छात्र अंशुमान जायसवाल के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि छात्र को 11वीं कक्षा में विज्ञान संकाय में ही पढ़ाई जारी रखने और परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए।

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मामला तब सामने आया जब सेंट जोसेफ स्कूल प्रबंधन ने कक्षा 10 में प्राप्त अंकों के आधार पर अंशुमान को विज्ञान संकाय में प्रवेश तो दे दिया, लेकिन बाद में बोर्ड परीक्षा में तय न्यूनतम प्रतिशत से कम अंक होने का हवाला देकर उसे जबरन विज्ञान से हटाकर कॉमर्स संकाय में भेजने का आदेश दे दिया। छात्र और उसके माता-पिता द्वारा बार-बार निवेदन करने के बावजूद स्कूल प्रबंधन ने अंशुमान को कक्षा में बैठने तक से रोक दिया।

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छात्र के पिता राजकुमार जायसवाल ने इस फैसले को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में चुनौती दी, लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिली। अंततः उन्होंने बेटे के भविष्य को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

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23 जनवरी को न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की खंडपीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई के बाद अहम निर्णय सुनाया। अदालत ने आदेश दिया कि छात्र अंशुमान जायसवाल को 11वीं कक्षा में विज्ञान संकाय में ही पढ़ाई पूरी करने दी जाए और नियमों के अनुसार परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जाए।

साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिए कि छात्र द्वारा 11वीं में प्राप्त अंकों के आधार पर स्कूल प्रबंधन और जिलाधिकारी देहरादून आपसी विचार-विमर्श कर यह तय करें कि उसे 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा विज्ञान संकाय से देने की अनुमति दी जाए या नहीं। इस फैसले से अंशुमान को अपनी प्रतिभा साबित करने और विज्ञान विषय में आगे बढ़ने का पूरा अवसर मिलेगा।

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सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को शिक्षा जगत में छात्रों के अधिकारों की बड़ी जीत माना जा रहा है। छात्र के पिता श्री राजकुमार जायसवाल ने न्यायालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला न सिर्फ उनके बेटे, बल्कि उन सभी छात्रों के लिए मिसाल है, जो स्कूलों की मनमानी का शिकार होते हैं।

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