अमेरिका ने जारी किया भारत का ‘पूर्ण नक्शा’, POK सहित जम्मू-कश्मीर को दिखाया अपना हिस्सा
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क की घोषणा के साथ ही अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ऑफिस (USTR) ने भारत का एक ऐसा नक्शा जारी किया है, जिसमें पूरे जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग दिखाया गया है। इस नक्शे में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) और अक्साई चिन दोनों क्षेत्रों को बिना किसी विवादित चिह्न या लाइन ऑफ कंट्रोल के भारत में शामिल किया गया है। इस घटना को पाकिस्तान के लिए बड़ा कूटनीतिक झटका माना जा रहा है, जबकि भारत में इसे अमेरिका की मजबूत समर्थन की निशानी के रूप में देखा जा रहा है।
USTR ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर अंतरिम व्यापार समझौते के फायदों को हाइलाइट करते हुए एक पोस्ट किया। इसमें लिखा था कि ‘ट्री नट्स, ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन, रेड सोरघम और ताजे व प्रोसेस्ड फलों’ जैसे अमेरिकी उत्पादों के लिए भारत में नए बाजार खुलेंगे। हालांकि, पोस्ट के साथ साझा किए गए ग्राफिक में भारत का राजनीतिक नक्शा इस्तेमाल किया गया, जिसमें जम्मू-कश्मीर, लद्दाख का अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश को पूर्ण रूप से भारत का हिस्सा दिखाया गया है। नक्शे में कोई अलग सीमांकन, डॉटेड लाइन या विवादित क्षेत्र का उल्लेख नहीं है।
यह नक्शा अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों में पारंपरिक तटस्थता से अलग है, जहां अक्सर कश्मीर पर विवादित क्षेत्रों को अलग से चिह्नित किया जाता था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत-अमेरिका के बढ़ते रणनीतिक संबंधों का प्रतीक है और पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश देता है कि वाशिंगटन जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा मानता है।
व्यापार समझौते की मुख्य बातें
- अमेरिकी उत्पादों के लिए भारत में बाजार पहुंच बढ़ेगी।
- भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ को 18 प्रतिशत तक घटाया गया है, जो एशियाई देशों में सबसे कम है।
- समझौता दोनों देशों के बीच नौकरियां, निवेश और आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस फ्रेमवर्क का स्वागत करते हुए कहा कि यह भारत-अमेरिका संबंधों में नई ऊंचाई लाएगा और दोनों देशों के लिए लाभकारी साबित होगा। सोशल मीडिया पर इस नक्शे को ‘भारत का सही नक्शा’ कहकर व्यापक समर्थन मिला है। कई यूजर्स ने इसे पाकिस्तान के लिए ‘मिरर दिखाने’ वाला कदम बताया। हालांकि, अमेरिकी पक्ष से अभी तक इस नक्शे पर कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं आई है, लेकिन इसे ट्रंप प्रशासन की नीति के अनुरूप देखा जा रहा है।
