February 5, 2026

उत्तराखंड : क्वानू-मीनस मोटर मार्ग बस हादसे में घायलों का हाल जानने दून अस्पताल पहुंचे सीएम धामी

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देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को देहरादून के राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने कालसी क्षेत्र के क्वानू-मीनस मोटर मार्ग पर हिमाचल प्रदेश रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (एचआरटीसी) की बस के खाई में गिरने से घायल हुए यात्रियों का हालचाल जाना और उनका मनोबल बढ़ाया। मुख्यमंत्री ने घायलों से व्यक्तिगत मुलाकात की, उनके परिजनों से बातचीत की और चिकित्सकों से उपचार की स्थिति पर विस्तृत जानकारी ली।

यह दुर्घटना मंगलवार सुबह करीब 10 बजे हुई थी, जब नेरवा-चौपाल (हिमाचल प्रदेश) से पांवटा साहिब जा रही एचआरटीसी की बस हरिपुर-क्वानू-मीनस मार्ग पर क्वानू के पास अनियंत्रित होकर सड़क से फिसल गई। प्रारंभिक जांच में पता चला कि ट्रक को साइड देने के दौरान सड़क का पुश्ता ढह गया, जिससे बस लगभग 100 मीटर गहरी खाई में जा गिरी। बस में 30 से अधिक यात्री सवार थे। हादसे में चार लोगों की मौत हो गई (सभी हिमाचल प्रदेश के निवासी), जबकि 32 से अधिक घायल हुए हैं, जिनमें से 12 की हालत गंभीर बताई जा रही है। मृतकों में दो महिलाएं शामिल हैं।

अस्पताल पहुंचने पर मुख्यमंत्री धामी ने सबसे पहले दिवंगत यात्रियों के प्रति गहरी शोक संवेदना व्यक्त की और ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की। उन्होंने घायलों से बातचीत करते हुए कहा, “राज्य सरकार आपके इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। सभी घायलों को सर्वोत्तम और त्वरित उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।” मुख्यमंत्री ने चिकित्सकीय टीम को निर्देश दिए कि घायलों का इलाज प्राथमिकता पर किया जाए और किसी भी कमी न आने दी जाए।

मुख्यमंत्री ने घायलों के परिजनों से भी मुलाकात की और उन्हें आश्वासन दिया कि उत्तराखंड सरकार सभी आवश्यक सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने विकासनगर के उप जिला चिकित्साधिकारी से फोन पर बात कर वहां उपचाराधीन घायलों को भी संवेदनशील और समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

साथ ही, हिमाचल प्रदेश सरकार को आश्वस्त किया कि उत्तराखंड में भर्ती सभी हिमाचल के घायल यात्रियों का निःशुल्क और उचित उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने दुर्घटना के कारणों की जांच के लिए भी आवश्यक निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे रोके जा सकें।

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