January 22, 2026

उत्तराखंड : प्राथमिक शिक्षक काउंसलिंग, क्या कानूनी दांव-पेच में फंसेगी भर्ती, ये है वजह!

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देहरादून : उत्तराखंड शिक्षा विभाग द्वारा प्राथमिक स्तर पर सहायक अध्यापक (बेसिक) के 1670 पदों के लिए 12 जनवरी को एक साथ सभी जिलों में आयोजित काउंसलिंग प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। विभाग द्वारा पहली बार सभी जिलों में एक ही दिन काउंसलिंग कराने के प्रयोग से कई जिलों में भारी भीड़, हंगामा और अव्यवस्था की स्थिति बनी, जबकि कुछ जगहों पर कम मेरिट वाले अभ्यर्थियों के चयन की शिकायतें सामने आई हैं। इससे पूरी भर्ती प्रक्रिया कानूनी दांव-पेंच में फंसने की आशंका जताई जा रही है।

शिक्षा विभाग ने पहले अलग-अलग तिथियों पर काउंसलिंग कराई जाती थी, जिससे अभ्यर्थी एक जिले की नियुक्ति छोड़कर दूसरे जिले में चले जाते थे और कई पद खाली रह जाते थे। इस समस्या से निपटने के लिए विभाग ने इस बार नए प्रयोग के तहत 12 जनवरी को सभी जिलों में एक साथ काउंसलिंग का आयोजन किया। लेकिन इससे जहां पदों के मुकाबले कई गुना अधिक अभ्यर्थी पहुंचे, वहां हंगामे की स्थिति बन गई।

कई जिलों में अच्छी मेरिट वाले अभ्यर्थी काउंसलिंग में शामिल नहीं हो पाए, जबकि कम मेरिट वाले अभ्यर्थियों को मौका मिला। कुछ अभ्यर्थी डीईओ कार्यालय पहुंचे लेकिन उनकी काउंसलिंग नहीं हुई। विभाग का दावा है कि काउंसलिंग के लिए मेरिट सूची विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध थी और अभ्यर्थियों को मेरिट देखकर ही पहुंचना चाहिए था। वहीं अभ्यर्थियों का कहना है कि विभाग ने सभी को एक साथ बुला लिया, जिससे भ्रम की स्थिति बनी।

अभ्यर्थियों ने सुझाव दिया है कि विभाग को पहले केवल उच्च मेरिट वाले अभ्यर्थियों को काउंसलिंग के लिए बुलाना चाहिए था। उसके बाद खाली रहने वाले पदों के लिए अगले दिन कम मेरिट वालों को बुलाया जाना चाहिए था। इससे प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित रहती।

इस मामले में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय नौडियाल से संपर्क करने के प्रयास सफल नहीं हुए। शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि प्रक्रिया पारदर्शी रखने के लिए यह प्रयोग किया गया, लेकिन भारी भीड़ और कुछ जिलों में अव्यवस्था के कारण समीक्षा की जा रही है।

उत्तराखंड में प्राथमिक शिक्षा में शिक्षकों की कमी लंबे समय से समस्या बनी हुई है। हाल के वर्षों में 1649-1670 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है, लेकिन नियमावली, मेरिट और काउंसलिंग से जुड़े विवाद बार-बार सामने आ रहे हैं। अभ्यर्थी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि कम मेरिट वालों का चयन साबित हुआ तो अदालत में चुनौती दी जाएगी, जिससे भर्ती प्रक्रिया लंबित हो सकती है।

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