January 23, 2026

उत्तराखंड : शिक्षकों के तबादलों की नई नियमावली तैयार, बोर्ड रिजल्ट खराब तो चढ़ना होगा पहाड़

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देहरादून। प्रदेश में शिक्षकों के तबादलों को लेकर शिक्षा विभाग ने एक नई नियमावली तैयार कर ली है, जिसे अंतिम मंजूरी के लिए जल्द ही कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। नियमावली में कई बड़े बदलाव किए गए हैं, जिनका सीधा असर प्रदेश के हजारों शिक्षकों पर पड़ेगा। सबसे महत्वपूर्ण प्रावधानों में एक यह है कि यदि किसी शिक्षक का 10वीं या 12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम लगातार दो साल तक खराब रहता है, तो उसे अनिवार्य रूप से पर्वतीय क्षेत्र में भेजा जाएगा। शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह सख्त प्रावधान जोड़ा गया है।

प्रदेश को दो भागों में बांटकर तय होगी तैनाती

नई नियमावली के तहत राज्य को अब “पर्वतीय” और “मैदानी” दो वर्गों में विभाजित किया गया है। शिक्षकों की तैनाती इन क्षेत्रों में किए गए कार्यकाल के अंक (गुणांक) के आधार पर की जाएगी। यह पूरी प्रक्रिया एक विशेष सॉफ्टवेयर के माध्यम से ऑनलाइन संचालित की जाएगी, जिससे तबादलों में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। पिथौरागढ़, उत्तरकाशी, चमोली और बागेश्वर जिलों को उच्च पर्वतीय क्षेत्र घोषित किया गया है, जबकि टिहरी, रुद्रप्रयाग, अल्मोड़ा, चंपावत, नैनीताल, पौड़ी और देहरादून के पर्वतीय हिस्सों को निम्न पर्वतीय क्षेत्र माना जाएगा।

एक जनवरी से शुरू होगी तबादलों की प्रक्रिया

शिक्षकों के तबादलों की प्रक्रिया हर साल एक जनवरी से शुरू होकर 31 मार्च तक पूरी कर दी जाएगी। तबादला आदेश उसी अवधि में जारी किए जाएंगे। नियमावली के अनुसार, पर्वतीय और मैदानी क्षेत्र के उप-क्षेत्रों में अधिकतम पांच वर्ष तक की सेवा सीमा तय की गई है।

विवाह के बाद एक बार तबादले की छूट

महिला शिक्षकों को पूरे सेवाकाल में विवाह के पश्चात पति के कार्यस्थल या गृह जिले में एक बार तबादले की विशेष छूट दी जाएगी। इसके अलावा शिक्षकों को अपने संवर्ग में तीन साल की सेवा पूरी करने के बाद पूरे सेवाकाल में एक बार संवर्ग परिवर्तन की अनुमति भी दी जाएगी।

SCERT, DIET, SIEMAT के लिए भी यही व्यवस्था

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT), जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET), और SIEMAT में कार्यरत शिक्षकों के तबादले भी तब तक इसी नियमावली के अंतर्गत होंगे, जब तक इन संस्थानों के लिए अलग से कैडर तैयार नहीं किया जाता।नियमावली में यह भी स्पष्ट किया गया है कि तबादला शिक्षक का मूल अधिकार नहीं होगा। किसी बिंदु पर व्यवहारिक समस्या उत्पन्न होने की स्थिति में सरकार या विभाग निर्णय लेगा।

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