January 28, 2026

गंगोत्री धाम में गैर हिंदुओं पर प्रतिबंध, बद्री-केदारनाथ समेत अन्य मंदिरों में भी कड़े नियमों की तैयारी

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उत्तरकाशी: उत्तराखंड के पवित्र चार धामों में से एक गंगोत्री धाम में गैर हिंदुओं की एंट्री पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है। यह कदम मंदिर की धार्मिक पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। इसके साथ ही, बद्रीनाथ धाम, केदारनाथ धाम और अन्य प्रमुख हिंदू मंदिरों में भी इसी तरह के प्रतिबंध लगाने की तैयारी चल रही है। यह जानकारी विभिन्न समाचार स्रोतों और आधिकारिक बयानों से प्राप्त हुई है, जो हाल के दिनों में सोशल मीडिया और न्यूज पोर्टल्स पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

गंगोत्री धाम में नया नियम

उत्तराखंड सरकार और मंदिर प्रबंधन समिति के अनुसार, गंगोत्री धाम में अब केवल हिंदू धर्मावलंबियों को ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। गैर हिंदुओं, जिसमें विदेशी पर्यटक और अन्य धर्मों के अनुयायी शामिल हैं, को मंदिर के आंतरिक क्षेत्र में जाने की छूट नहीं मिलेगी। यह नियम 2026 के यात्रा सीजन से लागू होने की उम्मीद है। मंदिर समिति के एक अधिकारी ने बताया, “यह निर्णय मंदिर की प्राचीन परंपराओं और धार्मिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। गंगा नदी के उद्गम स्थल पर पवित्रता बनाए रखना हमारा प्राथमिक उद्देश्य है।”

हाल के वर्षों में, गंगोत्री जैसे तीर्थ स्थलों पर पर्यटकों की बढ़ती संख्या के कारण धार्मिक स्थलों पर भीड़भाड़ और प्रदूषण की समस्या बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रतिबंध न केवल धार्मिक भावनाओं की रक्षा करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मददगार साबित होगा।

बद्री-केदारनाथ और अन्य मंदिरों पर असर

इस निर्णय का असर बद्रीनाथ धाम और केदारनाथ धाम जैसे अन्य प्रमुख हिंदू तीर्थ स्थलों पर भी पड़ने वाला है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटी) ने संकेत दिया है कि वे भी गैर हिंदुओं के प्रवेश पर समीक्षा कर रहे हैं। एक आधिकारिक बयान में कहा गया, “हम चार धाम यात्रा को धार्मिक अनुष्ठानों के अनुरूप रखने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे। केदारनाथ में पहले से ही कुछ प्रतिबंध हैं, जिन्हें और सख्त किया जा सकता है।”

इसके अलावा, तिरुपति बालाजी मंदिर (आंध्र प्रदेश) और सबरीमाला मंदिर (केरल) जैसे अन्य मंदिरों में भी गैर हिंदुओं पर प्रतिबंध की मांग लंबे समय से उठ रही है। तिरुपति मंदिर में पहले से ही गैर हिंदुओं को आंतरिक क्षेत्र में प्रवेश की मनाही है और अब उत्तराखंड के मॉडल को अन्य राज्यों में अपनाने की चर्चा हो रही है। धार्मिक संगठनों ने इस कदम का स्वागत किया है, जबकि पर्यटन उद्योग से चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं कि इससे विदेशी पर्यटकों की संख्या प्रभावित हो सकती है।

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