SC-ST एक्ट ‘देश का सबसे बड़ा काला कानून’, 7 फरवरी से आंदोलन का ऐलान
बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने रविवार शाम केदारघाट स्थित विद्या मठ में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात की। शंकराचार्य का आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद अलंकार ने मीडिया से बातचीत की और स्पष्ट किया कि यह मुलाकात किसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि शुभ संयोग है।
अलंकार ने बताया कि शंकराचार्य से सामाजिक परिस्थितियों पर विस्तृत चर्चा हुई। इससे पहले प्रयागराज में शंकराचार्य ने उन्हें आमंत्रित किया था, लेकिन समयाभाव के कारण वह नहीं पहुंच सके थे। काशी में शंकराचार्य के आगमन पर मुलाकात का अवसर मिला। अलंकार ने कहा कि काशी से उनका व्यक्तिगत जुड़ाव है क्योंकि उन्होंने आईआईटी-बीएचयू से शिक्षा प्राप्त की है, इसलिए यहां आना भावनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण है।
SC-ST एक्ट पर तीखा हमला
मुलाकात के दौरान अलंकार अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार की नीतियों, खासकर अनुसूचित जाति-जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC-ST एक्ट) और प्रस्तावित यूजीसी रेगुलेशन पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा, “1989 में लागू SC-ST एक्ट देश का सबसे बड़ा काला कानून है। इस कानून के तहत दर्ज लगभग 95 प्रतिशत मामले फर्जी होते हैं, जिससे समाज के बड़े वर्ग को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है।”
उन्होंने दावा किया कि यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए दिशानिर्देशों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है, लेकिन असल मुद्दा SC-ST एक्ट को खत्म करना है। अलंकार ने चेतावनी दी, “यदि 6 फरवरी तक SC-ST एक्ट वापस नहीं लिया गया, तो केंद्र सरकार को उखाड़ फेंका जाएगा। हम केंद्र सरकार को चार्टर्ड प्लेन में बिठाकर गुजरात वापस भेज देंगे।”
लड़ाई केंद्र से, राज्य से नहीं
जब उनसे पूछा गया कि पहले विवाद राज्य सरकार से था, तो अब केंद्र को क्यों निशाना बनाया जा रहा है, तो अलंकार ने स्पष्ट किया, “लड़ाई असल में कभी राज्य सरकार से नहीं थी, बल्कि मुख्य रूप से केंद्र सरकार से थी।” उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह राज्य सरकार को अस्थिर करने की कोशिश में उसके साथ भेदभाव कर रहे हैं। राज्य प्रशासन बहुत दबाव में काम कर रहा है और केंद्र का इरादा राज्य का सारा फंड गुजरात भेजने का है।
इस्तीफे का कारण: सनातन संस्कृति का अपमान
29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा UGC के नए रेगुलेशन 2026 पर रोक लगाने के बाद अलंकार ने शिक्षा में जाति-आधारित भेदभाव से संबंधित प्रावधानों के संस्थागत दुरुपयोग की बात कही। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी प्रथाएं देश में गंभीर सामाजिक अशांति पैदा कर सकती हैं।
अलंकार ने कहा कि प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य के पवित्र स्नान को लेकर हुए विवाद और सनातन संस्कृति के प्रतीकों के अपमान को देखकर वह इसे बर्दाश्त नहीं कर सके, इसलिए उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद से वह लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं।
