June 19, 2026

चार धाम यात्रा: तीर्थयात्रियों को मिलेगा मजबूत स्वास्थ्य कवच, ई-स्वास्थ्य धाम पोर्टल से रीयल-टाइम मॉनिटरिंग

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देहरादून: उत्तराखंड में आगामी चार धाम यात्रा (यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ) को सुरक्षित और स्वास्थ्य-सुरक्षित बनाने के लिए राज्य सरकार ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने बताया कि यात्रा के दौरान प्रत्येक तीर्थयात्री के स्वास्थ्य की ई-स्वास्थ्य धाम पोर्टल पर रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। इससे आपात स्थिति में त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित होगी और श्रद्धालुओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

डॉ. रावत ने कहा कि स्वस्थ एवं सुरक्षित यात्रा के लिए विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। यात्रा मार्ग, मुख्य पड़ावों और चारों धामों में स्थायी तथा अस्थायी चिकित्सा इकाइयों को पूरी तरह चाक-चौबंद किया जाएगा।

मुख्य स्वास्थ्य व्यवस्थाएं इस प्रकार हैं:

एम्बुलेंस व्यवस्था — यात्रा रूट पर कुल 177 एम्बुलेंस तैनात रहेंगी, जिनमें 108 आपातकालीन सेवा, एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) एम्बुलेंस और कार्डियक एम्बुलेंस शामिल हैं। टिहरी में एक वॉटर एम्बुलेंस और एक हेली एम्बुलेंस भी मुस्तैद रहेगी, जिसका संचालन AIIMS ऋषिकेश के माध्यम से होगा। एम्बुलेंस का न्यूनतम रिस्पांस टाइम सुनिश्चित किया जाएगा ताकि समय पर इलाज मिल सके।

मेडिकल रिलीफ पोस्ट और स्क्रीनिंग प्वाइंट — यात्रा मार्ग पर 25 मेडिकल रिलीफ पोस्ट और 33 हेल्थ स्क्रीनिंग प्वाइंट स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं (जैसे ऊंचाई से संबंधित बीमारियां) की जांच और उपचार किया जाएगा।

स्टाफ तैनाती — विशेषज्ञ चिकित्सकों, मेडिकल ऑफिसरों, फार्मासिस्टों और पैरामेडिकल स्टाफ की रोटेशन आधार पर ड्यूटी लगाई जाएगी। इसमें 16 विशेषज्ञ चिकित्सक, 46 मेडिकल ऑफिसर और 85 पैरामेडिकल स्टाफ 15 दिनों के रोस्टर पर तैनात रहेंगे। इसके अलावा 100 स्वास्थ्य मित्र भी यात्रा मार्ग पर मदद के लिए उपलब्ध रहेंगे।

डॉ. रावत ने जोर दिया कि इन सभी व्यवस्थाओं से तीर्थयात्रियों को उच्च ऊंचाई वाली चुनौतियों से निपटने में आसानी होगी और आपात स्थिति में तुरंत सहायता मिल सकेगी। ई-स्वास्थ्य धाम पोर्टल यात्रियों के स्वास्थ्य डेटा को ट्रैक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे पहले से ही जोखिम वाले मामलों की पहचान संभव हो सकेगी।

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