May 24, 2026

पहाड़ों में बढ़ रही टेंशन : खाली होते गांव, आपदाएं और अकेलापन बना अवसाद की बड़ी वजह

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जिन पहाड़ों की शांत वादियों में दुनिया सुकून तलाशने पहुंचती है, वहीं अब वहां के स्थानीय लोगों के लिए वही जीवन भय, अकेलेपन और मानसिक तनाव का कारण बनता जा रहा है। उत्तराखंड के दूरस्थ पहाड़ी इलाकों में लगातार बढ़ती प्राकृतिक आपदाएं, वन्यजीवों का खतरा, पलायन और सामाजिक अलगाव लोगों को मानसिक बीमारियों की ओर धकेल रहे हैं।

मनोवैज्ञानिकों और चिकित्सकों के अनुसार पहाड़ों में रहने वाला लगभग हर व्यक्ति किसी न किसी स्तर पर अवसाद और मानसिक दबाव से गुजर रहा है। प्राकृतिक आपदाओं में अपनों को खोने का दर्द, गांवों का वीरान होना, बाघ-तेंदुओं का भय और सामाजिक अकेलापन लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन परिस्थितियों के चलते लोग सोमाटाइजेशन डिसऑर्डर, पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD), सिजोफ्रेनिया, बाइपोलर डिसऑर्डर, साइकोसिस और डिमेंशिया जैसी गंभीर मानसिक समस्याओं की चपेट में आ रहे हैं। कई गांवों में अब सिर्फ बुजुर्ग ही रह गए हैं, जिनकी जिंदगी डर और इंतजार के बीच गुजर रही है।

“दवाई बाद में, पहले बात कर लो डॉक्टर साहब”

पौड़ी जिले के चैलूसैंण में तैनात चिकित्सक डॉ. आशीष गोसाईं बताते हैं कि उनके पास रोजाना करीब 25 मानसिक तनाव से जूझ रहे लोग पहुंचते हैं। इनमें 10 से 12 मरीज ऐसे होते हैं जो अकेलेपन और सामाजिक अलगाव से परेशान हैं। कई मरीज दवा लेने से पहले सिर्फ किसी से बात कर अपने मन का बोझ हल्का करना चाहते हैं।

आपदा ने छीन लिया घर और बेटा

उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में अगस्त 2025 की आपदा ने कई परिवारों की जिंदगी बदल दी। गांव की कामेश्वरी देवी बताती हैं कि आपदा में उन्होंने अपना घर और बेटा दोनों खो दिए। अब वे रिश्तेदारों के यहां रह रही हैं और लगातार तनाव, अनिद्रा तथा रक्तचाप की समस्या से जूझ रही हैं। विशेषज्ञ इसे पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर का मामला मान रहे हैं। धराली गांव में आपदा के बाद अधिकांश परिवार गांव छोड़ चुके हैं। ग्रामीणों का दावा है कि अब भी कई शव मलबे में दबे हो सकते हैं, जिससे लोगों में लगातार भय बना हुआ है।

वीरान गांवों में डर के साये में जिंदगी

पौड़ी जिले के तकल्लां गांव में अब सिर्फ एक परिवार बचा है। गांव की विमला देवी बताती हैं कि पूरा गांव खाली हो चुका है और शाम होते ही बाघ घरों तक पहुंच जाते हैं। अकेलापन और डर उनकी सबसे बड़ी समस्या बन चुके हैं।

हर महीने बढ़ रहे मानसिक रोगी

श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. मोहित सैनी के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में मानसिक रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। कई मरीज मानसिक तनाव के साथ अन्य शारीरिक बीमारियों से भी जूझ रहे हैं।

हर महीने पहुंचने वाले मानसिक रोगियों के आंकड़े

  • उत्तरकाशी जिला चिकित्सालय : 120 मरीज.
  • टिहरी जिला चिकित्सालय : 250 मरीज.
  • श्रीनगर मेडिकल कॉलेज : 750 मरीज.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पहाड़ों में स्वास्थ्य सुविधाओं, सामाजिक सहयोग और मानसिक परामर्श सेवाओं को मजबूत नहीं किया गया, तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

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