October 2, 2026

अवैध खनन में तहसील प्रशासन की भूमिका पर सवाल, एसडीएम पर ₹15 हजार की शास्ति

0
nutan-savera-breaking.jpg

कोटद्वार। वर्ष 2020 में कोटद्वार क्षेत्र में रिवर ट्रेनिंग के नाम पर हुए कथित अवैध खनन के मामले में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सामने आई जानकारी ने तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूचना के अधिकार के तहत की गई शिकायत की सुनवाई में सामने आया कि अवैध खनन से संबंधित तहसीलदार की निरीक्षण आख्या और सिंचाई विभाग की ओर से भेजे गए पत्रों का रिकॉर्ड उपजिलाधिकारी कार्यालय में उपलब्ध नहीं पाया गया। मामले में सूचना आयुक्त दिलीप सिंह कुंवर ने वर्तमान एसडीएम कोटद्वार पर 15 हजार रुपये की शास्ति लगाई है।

आरटीआई कार्यकर्ता मुजीब नैथानी की शिकायत के अनुसार, वर्ष 2020 में कोटद्वार में रिवर ट्रेनिंग के नाम पर किए गए खनन को लेकर तहसील स्तर से निरीक्षण किया गया था। तहसीलदार द्वारा उपलब्ध कराई गई निरीक्षण आख्याओं में से एक में कथित अवैध खनन की पुष्टि भी की गई थी। आरोप है कि तत्कालीन उपजिलाधिकारी स्तर से इस आख्या पर आवश्यक संज्ञान नहीं लिया गया।

मामले में आरटीआई के माध्यम से जब संबंधित अभिलेखों की जानकारी मांगी गई तो वर्तमान उपजिलाधिकारी कार्यालय की ओर से बताया गया कि तहसीलदार कोटद्वार द्वारा रिवर ट्रेनिंग के संबंध में दी गईं संबंधित आख्यायें कार्यालय में धारित नहीं हैं। इसी तरह सिंचाई विभाग की ओर से भेजे गए पत्र भी कार्यालय में उपलब्ध नहीं बताए गए।

सुनवाई के दौरान हालांकि सिंचाई विभाग की ओर से ऐसे पत्रों की प्राप्ति से संबंधित सूचना प्रस्तुत की गई, जिससे यह सवाल उठा कि यदि पत्र उपजिलाधिकारी कार्यालय को प्राप्त हुए थे तो बाद में उनके अभिलेख कार्यालय में उपलब्ध क्यों नहीं हैं।

सूचना आयुक्त दिलीप सिंह कुंवर ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि संबंधित अवधि में योगेश सिंह मेहरा कोटद्वार के उपजिलाधिकारी के पद पर तैनात थे। वहीं वर्तमान उपजिलाधिकारी संदीप कुमार द्वारा मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई जा सकीं। अभिलेखों के उपलब्ध न होने और सूचना उपलब्ध कराने में हुई स्थिति को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने वर्तमान एसडीएम कोटद्वार संदीप कुमार पर 15 हजार रुपये की शास्ति लगाई है। यह राशि दो किस्तों में देय होगी।

मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि वर्ष 2020 में जब कोटद्वार में रिवर ट्रेनिंग के नाम पर कथित अवैध खनन का मामला सामने आया था, उस समय वर्तमान सूचना आयुक्त दिलीप सिंह कुंवर गढ़वाल मंडल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे। अब वर्षों बाद आरटीआई के माध्यम से सामने आए अभिलेखों और उनकी अनुपलब्धता ने तत्कालीन कार्रवाई और सरकारी रिकॉर्ड के रखरखाव को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

आरटीआई शिकायत के आधार पर सामने आए तथ्यों से यह स्पष्ट हुआ है कि मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज वर्तमान में संबंधित कार्यालय में उपलब्ध नहीं बताए गए हैं। ऐसे में अवैध खनन की वास्तविक स्थिति, तत्कालीन अधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई और संबंधित अभिलेखों के गायब होने के कारणों को लेकर आगे भी सवाल उठ सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *