August 4, 2026

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: 800 करोड़ का था अनुमान, 2200 करोड़ खर्च होने का आरोप, पूर्व लेखा प्रभारी ने SIT को सौंपे साक्ष्य

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अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच के बीच नया मोड़ सामने आया है। ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को अपने आरोपों से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य सौंप दिए हैं। साथ ही उन्होंने ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय, सदस्य डॉ. अनिल मिश्र समेत कई अधिकारियों पर नए आरोप भी लगाए हैं।

महिपाल सिंह का दावा है कि राम मंदिर निर्माण की प्रारंभिक अनुमानित लागत करीब 800 करोड़ रुपये थी, लेकिन कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से निर्माण पर लगभग 2,200 करोड़ रुपये खर्च किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2021 में ही उन्होंने चढ़ावे में कथित गड़बड़ी पकड़ ली थी, लेकिन इसकी जानकारी देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।

बताया गया कि 26 जुलाई को एसआईटी अध्यक्ष एवं लखनऊ के आयुक्त विजय विश्वास पंत ने महिपाल सिंह को ई-मेल भेजकर आरोपों से संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया था। आवश्यकता पड़ने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उनका बयान दर्ज करने की भी बात कही गई थी।

कैश गिनती में अनियमितता के आरोप

महिपाल सिंह ने आरोप लगाया कि कैश गिनती के दौरान बैंककर्मी आवश्यकता से अधिक नोटों की गड्डियां ले जाकर चोरी करते थे। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में तत्कालीन महासचिव चंपत राय को जानकारी देने पर उन्हें चुप रहने को कहा गया और अगले ही दिन उनकी जगह सुभाष श्रीवास्तव की ड्यूटी लगा दी गई। उल्लेखनीय है कि सुभाष श्रीवास्तव फिलहाल पुलिस की गिरफ्त में हैं।

निर्माण कार्य और खरीद प्रक्रिया पर भी सवाल

पूर्व लेखा प्रभारी ने मंदिर निर्माण प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इलेक्ट्रिकल इंजीनियर जगदीश आफले को परियोजना का प्रोजेक्ट इंजीनियर बनाया गया, जबकि उन्हें सिविल इंजीनियरिंग का अनुभव नहीं था। इसके कारण निर्माण कार्य निर्धारित मानकों और वास्तु अनुरूप नहीं हुआ।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बंशी पहाड़पुर के पत्थर निशुल्क उपलब्ध होने के बावजूद ट्रस्ट ने निम्न गुणवत्ता के पत्थरों की खरीद की। इसके अलावा विवादित संपत्तियों की खरीद, ट्रस्ट कार्यालय के स्थान चयन और निर्माण कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं के भी आरोप लगाए गए हैं।

भुगतान और वित्तीय प्रबंधन पर सवाल

महिपाल सिंह ने एसआईटी को बताया कि तत्कालीन कैशियर वीरेंद्र वर्मा द्वारा ऐसे लोगों के नाम भी भुगतान किए गए जिन्होंने कोई कार्य नहीं किया। वहीं ट्रस्ट के वित्तीय सलाहकार एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट चंदन राय पर भी निर्माण कंपनियों के बिल रोकने, अधिक भुगतान कराने तथा कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।

हालांकि इन आरोपों के बीच ट्रस्ट ने बैंक खातों के संचालन के लिए चंदन राय को अधिकृत किया है। वर्तमान में अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन और इंजीनियर जगदीश आफले के संयुक्त हस्ताक्षरों से गणना के बाद धनराशि बैंक में जमा कराई जा रही है।

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