May 6, 2026

BKTC पर फिर गंभीर आरोप: केदार सभा को 11 लाख के भुगतान पर उठे सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग

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देहरादून: श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सामने आए दस्तावेजों के आधार पर समिति पर केदारनाथ धाम में तीर्थ-पुरोहितों की संस्था “केदार सभा” को 11 लाख रुपये का भुगतान नियमों को दरकिनार कर करने के आरोप लगे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने इस पूरे मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

ढाई महीने बाद स्वीकृति, प्रक्रिया पर सवाल
अधिवक्ता विकेश नेगी के अनुसार, केदारनाथ धाम में 25 जुलाई से 1 अगस्त 2025 के बीच श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन हुआ था। हैरानी की बात यह है कि आयोजन समाप्त होने के करीब ढाई महीने बाद 12 अक्टूबर 2025 को बीकेटीसी ने आनन-फानन में दो अलग-अलग नोटशीट तैयार कर 11 लाख रुपये की स्वीकृति दे दी। इन दस्तावेजों पर तत्कालीन मुख्य कार्याधिकारी विजय थपलियाल, उपाध्यक्ष विजय सिंह कप्रवाण और अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के हस्ताक्षर दर्ज हैं। नेगी ने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया में वित्त नियंत्रक की सहमति नहीं ली गई, जो वित्तीय नियमों का सीधा उल्लंघन है। साथ ही, यह भी स्पष्ट नहीं है कि केदार सभा की ओर से आर्थिक सहायता के लिए कोई औपचारिक आवेदन किया गया था या नहीं।

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विरोध के बाद भुगतान, ‘सेटिंग’ के आरोप
मामले को और संदिग्ध बनाता है घटनाक्रम का समय। नेगी के अनुसार, 10 अक्टूबर 2025 को केदार सभा ने बीकेटीसी अध्यक्ष की कार्यशैली के खिलाफ मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आंदोलन की चेतावनी दी थी। इसके ठीक दो दिन बाद 12 अक्टूबर को 11 लाख रुपये की स्वीकृति मिलना कई सवाल खड़े करता है। नेगी का आरोप है कि यह भुगतान विरोध को शांत कराने के उद्देश्य से किया गया, जो दान-चढ़ावे के दुरुपयोग का संकेत देता है।

लाइव स्ट्रीमिंग भुगतान और कोटेशन प्रक्रिया भी संदेह के घेरे में
मामले में एक और पहलू सामने आया है, जिसमें कथा के लाइव प्रसारण के लिए ‘तीतर मीडिया एंड एडवर्टाइजिंग कंपनी’ को 1.5 लाख रुपये का भुगतान किया गया। आरोप है कि इस कार्य के लिए अपनाई गई कोटेशन प्रक्रिया संदिग्ध थी। तीन अलग-अलग कंपनियों के कोटेशन एक ही तारीख पर और लगभग समान भाषा में प्रस्तुत किए गए, जिससे मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।

नियमों के विरुद्ध नियुक्तियां भी सवालों में
नेगी ने यह भी आरोप लगाया कि बीकेटीसी ने केदार सभा से जुड़े कुछ लोगों को “विशेष आमंत्रित सदस्य” के रूप में नियुक्त किया, जबकि इसके लिए पहले शासन स्तर पर नियम बनना आवश्यक है। ऐसे में इन नियुक्तियों की वैधानिकता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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पहले भी लग चुके हैं आरोप
अधिवक्ता नेगी ने दावा किया कि इससे पहले भी बीकेटीसी के एक उपाध्यक्ष पर अपनी पत्नी को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दिखाकर वेतन लेने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने कहा कि लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।

सीएम से जांच और कार्रवाई की मांग
विकेश सिंह नेगी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो इससे न केवल मंदिर समिति की विश्वसनीयता प्रभावित होगी, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को भी ठेस पहुंचेगी।

आस्था बनाम आरोपों की चुनौती
बदरीनाथ और केदारनाथ धाम देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं। ऐसे में मंदिर समिति पर लग रहे वित्तीय अनियमितता के आरोप न केवल प्रशासनिक बल्कि धार्मिक विश्वास के स्तर पर भी गंभीर माने जा रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या आरोपों की निष्पक्ष जांच हो पाती है या नहीं।

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