June 25, 2026

चिन्यालीसौड़ नगर पालिका में करोड़ों के कार्यों पर सवाल, प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में सामने आई अनियमितताएं, उच्च स्तरीय जांच की संस्तुति

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उत्तरकाशी। नगर पालिका परिषद चिन्यालीसौड़ में विकास कार्यों, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर सभासदों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। उपजिलाधिकारी स्तर पर गठित जांच समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपते हुए पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की संस्तुति की है।

नगर पालिका के सातों सभासदों ने शपथ पत्र देकर आरोप लगाया था कि बोर्ड बैठकों में उनकी अनदेखी की जा रही है, विकास कार्यों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही तथा निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है। सभासदों ने नगर पालिका द्वारा कराए गए सीसीटीवी, स्ट्रीट लाइट, निर्माण कार्यों और कूड़ा प्रबंधन से जुड़े सभी कार्यों का विवरण सार्वजनिक करने, बोर्ड बैठकों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने और उनके अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की थी।

कई बार टली जांच, फिर सामने आए तथ्य
शिकायत मिलने के बाद अप्रैल 2026 में जांच शुरू की गई, लेकिन बहुउद्देशीय शिविर, चारधाम यात्रा और मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों के कारण कई बार जांच स्थगित करनी पड़ी। अंततः 23 अप्रैल को समिति ने चिन्यालीसौड़ पहुंचकर अभिलेखों की जांच की तथा 6 मई को अध्यक्ष, सभासदों और अधिशासी अधिकारी का पक्ष सुना।

जांच के दौरान अध्यक्ष मनोज कोहली “श्याम” ने अधिशासी अधिकारी को राजनीतिक दबाव के चलते निदेशालय से संबद्ध किए जाने का आरोप लगाया और कहा कि अधिकारी की अनुपस्थिति से विकास कार्य प्रभावित हुए हैं। वहीं सभी सभासदों ने अपनी शिकायतों की पुष्टि करते हुए निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग दोहराई।

वाहनों की लॉग बुक में मिलीं खामियां
समिति को नगर पालिका के कई वाहनों की लॉग बुक में गंभीर कमियां मिलीं। जांच में पाया गया कि कई वाहनों में प्रतिदिन संबंधित अधिकारी या चालक के हस्ताक्षर नहीं किए गए थे।

वाहन संख्या UK07CA4695 की लॉग बुक में 25 जनवरी 2025 से 27 फरवरी 2026 के बीच 23 दिनों तक जनपद से बाहर यात्रा दर्ज थी, लेकिन नगर पालिका केवल तीन यात्राओं का ही सत्यापन प्रस्तुत कर सकी। शेष 20 यात्राओं का कोई विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया, जिसके चलते समिति ने उन यात्राओं की पुष्टि करने से इंकार कर दिया।

निविदा और कार्य आवंटन पर उठे सवाल
रिपोर्ट में निविदा प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर टिप्पणियां की गई हैं। समिति के अनुसार कई मामलों में कोटेशन जमा करने की अंतिम तिथि बिना स्पष्ट कारण बढ़ाई गई। कुछ कार्यों में एक ही ठेकेदार को एक साथ कई कार्य आवंटित किए गए।

6 मार्च 2026 को जारी निविदा में कुल 33 कार्य आवंटित किए गए, जिनमें से कई कार्य सीमित संख्या के ठेकेदारों को दिए गए। जांच में सामने आया कि एक ठेकेदार को चार, दूसरे को तीन और तीसरे को दो कार्य दिए गए। समिति ने इसे प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया की भावना के विपरीत माना। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कुछ ठेकेदारों और फर्मों को बार-बार कार्य आवंटित किए जाने की शिकायत जांच में सही पाई गई।

डस्टबिन और सोलर लाइट खरीद पर सवाल
नगर पालिका द्वारा डस्टबिन खरीद में भी अनियमितता की आशंका जताई गई है। जांच में पाया गया कि 50 डस्टबिन 4200 रुपये प्रति इकाई और 25 डस्टबिन 7600 रुपये प्रति इकाई की दर से खरीदे गए। समिति ने प्रस्तुत नमूनों के आधार पर प्रथम दृष्टया इन्हें अधिक कीमत पर खरीदा जाना प्रतीत होने की बात कही है।
इसके अतिरिक्त वार्ड नंबर-1 स्थित नागराजा मंदिर में 21 सोलर लाइट खरीदने का रिकॉर्ड मिला, जिन पर प्रति यूनिट 18,400 रुपये का भुगतान किया गया।

11.66 करोड़ रुपये के खर्च का विवरण नहीं
जांच रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु वित्तीय पारदर्शिता से जुड़ा है। समिति के अनुसार 1 फरवरी 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच नगर पालिका परिषद चिन्यालीसौड़ को विभिन्न मदों में लगभग 11 करोड़ 66 लाख 63 हजार रुपये प्राप्त हुए, लेकिन इसके सापेक्ष व्यय का विस्तृत विवरण जांच समिति को उपलब्ध नहीं कराया गया। समिति ने इसे गंभीर मामला मानते हुए वित्तीय अभिलेखों की गहन जांच की आवश्यकता बताई है।

निविदा प्रकाशन पर भी आपत्ति
जांच में पाया गया कि नगर पालिका ने निविदाओं का प्रकाशन दैनिक भास्कर के उत्तरकाशी संस्करण में कराया। समिति ने टिप्पणी की कि संबंधित समाचार पत्र का जिले में प्रभावी प्रसार नहीं है, जबकि शासनादेश के अनुसार निविदाएं ऐसे माध्यमों में प्रकाशित की जानी चाहिएं जिनका व्यापक स्थानीय प्रसार हो। रिपोर्ट में आशंका व्यक्त की गई कि इससे कुछ विशेष ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने का प्रयास हो सकता है।

ठेकेदार के दस्तावेजों पर सवाल
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि एक ठेकेदार को तीन से अधिक कार्य आवंटित किए गए। उसके द्वारा प्रस्तुत हैसियत प्रमाण पत्र उपजिलाधिकारी के बजाय राजस्व उपनिरीक्षक द्वारा जारी किया गया था। समिति ने इसे गंभीर अनियमितता माना है।

सभासदों को नहीं मिल रहीं बोर्ड बैठकों की प्रतियां
समिति ने पाया कि बोर्ड प्रस्तावों की प्रतियां सभासदों को उपलब्ध कराए जाने का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं है। कई कार्यों के पूर्णता प्रमाण पत्रों में भी संबंधित वार्ड सभासदों के प्रमाणन का अभाव मिला।

जांच के बाद समिति ने तीन प्रमुख सिफारिशें की हैं। इनमें अध्यक्ष और सभासदों के बीच बने टकराव को दूर कर बोर्ड संचालन में सामंजस्य स्थापित किया जाए। तीन वर्षों से तैनात अधिशासी अधिकारी वीरेन्द्र पंवार के स्थानांतरण पर विचार किया जाए। 7 फरवरी 2025 से 28 मार्च 2026 के बीच नगर पालिका में हुए सभी कार्यों और वित्तीय मामलों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।

रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि नगर पालिका परिषद चिन्यालीसौड़ में विकास कार्यों को निष्पक्ष, पारदर्शी, सार्वजनिक और शासनादेशों के अनुरूप कराया जाना अपेक्षित है। अब निगाहें जिला प्रशासन और शासन पर हैं कि रिपोर्ट में उठाए गए सवालों पर आगे क्या कार्रवाई होती है।

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