November 3, 2026

छह महीने से अधिक की गर्भावस्था समाप्त करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- वैवाहिक कलह गर्भपात का आधार नहीं

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में छह महीने से अधिक की गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति मांगने वाली एक महिला की याचिका पर सुनवाई के दौरान वैवाहिक विवाद और अजन्मे बच्चे के अधिकारों को लेकर अहम टिप्पणी की गई। महिला ने अपने पति और ससुराल वालों पर प्रताड़ना और दुर्व्यवहार का आरोप लगाते हुए गर्भपात की अनुमति मांगी है। वहीं, पति ने इसका विरोध करते हुए कहा कि अजन्मे बच्चे पर उसका भी अधिकार है और वह जन्म के बाद उसकी पूरी जिम्मेदारी उठाने को तैयार है।

न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि केवल पति-पत्नी के बीच वैवाहिक विवाद या आपसी कलह गर्भावस्था समाप्त करने का आधार नहीं हो सकती। कोर्ट ने सवाल उठाया कि यदि वैवाहिक रिश्तों में तनाव और ससुराल पक्ष के साथ विवाद के आधार पर गर्भपात की अनुमति दी जाने लगे तो समाज किस दिशा में जाएगा।

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि बलात्कार, यौन उत्पीड़न या भ्रूण में गंभीर चिकित्सकीय समस्या जैसे मामलों की परिस्थितियां अलग होती हैं। मौजूदा मामला उनसे अलग है। कोर्ट ने महिला से बातचीत करते हुए कहा कि पति-पत्नी के बीच मतभेद और एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें होना आम बात है, लेकिन केवल इसी आधार पर गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। पीठ ने पिता के अधिकारों को लेकर भी सवाल उठाए।

महिला ने मांगा तलाक

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वर्चुअल माध्यम से याचिकाकर्ता महिला से बातचीत की। महिला ने स्पष्ट किया कि वह इस गर्भावस्था को आगे नहीं बढ़ाना चाहती और अपने पति से तलाक लेना चाहती है। दूसरी ओर, पति ने अदालत को आश्वस्त किया कि बच्चे के जन्म के बाद वह उसकी देखभाल और पूरी जिम्मेदारी उठाएगा।

मामले में पति की ओर से पत्नी के चरित्र को लेकर लगाए गए आरोप भी विवाद की प्रमुख वजह बने हुए हैं। इस पर कोर्ट ने पति से कहा कि यदि वह वैवाहिक रिश्ते को सुधारने और सुलह की दिशा में पहला कदम उठाना चाहता है तो उसे पहले पत्नी पर लगाए गए सभी आरोप वापस लेने के संबंध में हलफनामा दाखिल करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए बुधवार की तारीख निर्धारित की है। अब अगली सुनवाई में महिला की गर्भावस्था समाप्त करने की मांग और दोनों पक्षों के बीच विवाद पर आगे विचार किया जाएगा।

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