August 13, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए ‘इक्विटी’ नियमों पर लगाई रोक, कहा- नए नियम अस्पष्ट, दुरुपयोग की आशंका

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) द्वारा जारी ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026’ पर तत्काल रोक लगा दी है। कोर्ट ने इन नियमों को अस्पष्ट और दुरुपयोग की संभावना वाला बताते हुए केंद्र सरकार तथा यूजीसी को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। तब तक 2012 के पुराने यूजीसी नियम ही लागू रहेंगे।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने आज कई याचिकाओं पर सुनवाई की, जिनमें इन नियमों को सामान्य वर्ग के खिलाफ भेदभावपूर्ण तथा संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं में मृत्युंजय तिवारी, एडवोकेट विनीत जिंदल और राहुल दीवान शामिल हैं।

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, “हमें जातिविहीन समाज की ओर बढ़ना चाहिए या पीछे जा रहे हैं? क्या हम उल्टी दिशा में जा रहे हैं?” उन्होंने कहा कि जिन्हें सुरक्षा की जरूरत है, उनके लिए व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन नियमों की भाषा स्पष्ट नहीं है और इनका दुरुपयोग हो सकता है। कोर्ट ने एक विशेष कमेटी गठित करने का भी सुझाव दिया।

ये नियम 23 जनवरी 2026 को अधिसूचित किए गए थे, जिनका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग आदि आधारित भेदभाव को रोकना था। इनमें इक्विटी कमेटी गठन, शिकायत निवारण और सख्त कार्रवाई के प्रावधान थे। हालांकि, याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि ये नियम सामान्य वर्ग के छात्रों को शिकायत दर्ज करने से वंचित करते हैं तथा मनमाने ढंग से लागू किए जा सकते हैं, जो यूजीसी एक्ट, 1956 का भी उल्लंघन है।

नियमों की अधिसूचना के बाद देशभर में छात्रों और शिक्षाविदों में आक्रोश फैल गया था। कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से फिलहाल इन नियमों का क्रियान्वयन रुक गया है और पुरानी व्यवस्था बहाल हो गई है।

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